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धराली आपदा पर बीजेपी-कांग्रेस में जुबानी जंग, कांग्रेस बोली- सरकार हो और संवेदनशील, बीजेपी ने दिया जवाब- जीत का जश्न मनाकर कांग्रेस ने दिखाई अपनी परिपक्वता

देहरादून

पिछले दिनों उत्तरकाशी और पौ़ड़ी में आई आपदा में भारी नुकसान हुआ…धराली में अब तक कई लोग मलबे के नीचे दबे हुए हैं जिसकी तलाश की जा रही है….राज्य सरकार ने पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए मकानों के लिए पांच लाख रुपये और मृतकों के परिजनों को पांच लाख रुपये देने की बात कही और इन सब के बीच कांग्रेस की मांग है कि लोगों को औपचारिक मदद नहीं, बल्कि दीर्घकालिक समाधान की जरूरत है…

उत्तराखंड में 5 और 6 अगस्त को आई आपदा को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार से और अधिक संवेदनशील रवैया अपनाने की अपील की है…पार्टी के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि आपदा प्रभावित इलाकों में लोगों की पीड़ा को कम करने के लिए प्रशासन और सरकार को और ठोस कदम उठाने होंगे…उन्होंने जोशीमठ, धराली और हर्षिल जैसे क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रभावित लोगों को सिर्फ औपचारिक मदद नहीं, बल्कि दीर्घकालिक समाधान की जरूरत है

कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने 1991 के उत्तरकाशी भूकंप से लेकर 1999 के टिहरी, चमोली और रुद्रप्रयाग भूकंप तक का हवाला देते हुए कहा कि उत्तराखंड हमेशा से प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में रहा है…उनका कहना है कि आज भी आपदा प्रबंधन को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है ताकि पीड़ित परिवारों को समय पर राहत मिल सके…उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी गतिविधियों से ऊपर उठकर सभी राजनीतिक दलों को आपदा पीड़ितों के साथ खड़ा होना चाहिए और संयुक्त प्रयास करने चाहिए.
इधर बीजेपी के प्रदेश महामंत्री आदित्य कोठारी ने कहा कि प्रदेश नेतृत्व और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले ही सभी विजयी प्रत्याशियों को संकेत दिए थे कि हाल ही में आई आपदा के कारण जश्न को सादगी से मनाया जाए.. पौड़ी समेत कई इलाकों में भले ही जनहानि नहीं हुई, लेकिन व्यापक नुकसान हुआ है और इस समय पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा होना सरकार की प्राथमिकता है…कोठारी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि आपदा के बीच आतिशबाजी और जश्न मनाना उनकी अपरिपक्वता को दर्शाता है…उन्होंने दोहराया कि वर्षा और आपदा के इस दौर में राजनीति से ऊपर उठकर सभी दलों को प्रदेश और पीड़ित जनता को प्राथमिकता देनी चाहिए.

मकान क्षतिग्रस्त होने पर पांच लाख रुपये और मृतकों के परिजनों को पांच लाख रुपये घोषणा के बीच बाकई में कई सवाल है जिसका जवाब ना तो सत्तापक्ष के पास है ना ही विपक्ष के पास है…सवाल है कि इन बड़ी आपदाओं के लिए क्या कोई जिम्मेदार नहीं है..सवाल है कि क्या यह सच नहीं है कि विकास कार्यों के नाम पर प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया गया है…अब प्रकृति को नुकसान पहुंचाएंगे तो नुकसान के लिए तैयार तो रहना ही होगा.

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